वेश्या ने अपना जीवन अनेक पुरुषों की वासना की इच्छाओं को पूरा करने के लिए समर्पित कर दिया था। अपने मन, शरीर और शब्दों को कामुक प्रेमियों की सेवा में लगाते हुए, वह भगवान के भक्तिमय सेवा को पूरी तरह से भूल गई, और इस प्रकार उसका मन अत्यंत अस्थिर और विचलित था। अंततः, पूरी तरह से निराश होकर, उसका चेहरा और गला सूख गया, वह अपनी स्थिति के प्रति उदासीन महसूस करने लगी, और उसके मन में खुशी का उदय हुआ।
