Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.8.25-26: जब वेश्या पिंगला द्वार पर खड़ी हो गई, तो कई पुरुष आए और उसके घर के बाहर टहलते हुए निकल गए। उसकी आजीविका का एकमात्र साधन वेश्यावृत्ति था, इसलिए उसने चिंता से सोचा, "शायद यह जो अब आ रहा है, वह बहुत अमीर होगा... अरे! वह तो रुका ही नहीं, लेकिन मुझे विश्वास है कि कोई और ज़रूर आएगा। निश्चित रूप से यह जो आ रहा है वह मेरे प्यार की क़ीमत चुकाएगा और शायद खूब सारे पैसे देगा।" इस तरह व्यर्थ की आशा में वह दरवाजे पर टिकी रही और अपना काम पूरा न कर सकी और न ही सो सकी। बेचैनी में वह कभी गली में जाती और कभी अपने घर के अंदर चली जाती। इस तरह धीरे-धीरे आधी रात हो गई। | bhagavat अध्याय 11.8: पिंगला की कथा । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आगतेष्वपयातेषु सा सङ्केतोपजीविनी ।
अप्यन्यो वित्तवान् कोऽपि मामुपैष्यति भूरिद: ॥ २५ ॥
एवं दुराशया ध्वस्तनिद्रा द्वार्यवलम्बती ।
निर्गच्छन्ती प्रविशती निशीथं समपद्यत ॥ २६ ॥
अनुवाद
जब वेश्या पिंगला द्वार पर खड़ी हो गई, तो कई पुरुष आए और उसके घर के बाहर टहलते हुए निकल गए। उसकी आजीविका का एकमात्र साधन वेश्यावृत्ति था, इसलिए उसने चिंता से सोचा, "शायद यह जो अब आ रहा है, वह बहुत अमीर होगा... अरे! वह तो रुका ही नहीं, लेकिन मुझे विश्वास है कि कोई और ज़रूर आएगा। निश्चित रूप से यह जो आ रहा है वह मेरे प्यार की क़ीमत चुकाएगा और शायद खूब सारे पैसे देगा।" इस तरह व्यर्थ की आशा में वह दरवाजे पर टिकी रही और अपना काम पूरा न कर सकी और न ही सो सकी। बेचैनी में वह कभी गली में जाती और कभी अपने घर के अंदर चली जाती। इस तरह धीरे-धीरे आधी रात हो गई।
While the prostitute Pingla stood at the door, many men came and went walking past her house. Her only means of livelihood was prostitution, so she thought anxiously, "It is possible that the one who is coming now is very rich... Alas! He is not staying, but I am sure that someone else will come. Surely this one who is coming will repay my love and perhaps give me a lot of money." Thus, with a futile hope, she stood leaning against the door and could not finish her business and could not even go to sleep. In anxiety she would sometimes go out into the street and sometimes return inside her house. In this way, slowly midnight came.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥