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bhagavat 11.8.24: हे पुरुष-श्रेष्ठ, यह वेश्या धन पाने के लिए अत्यधिक आतुर थी और जब वह रात में गली में खड़ी थी, तो वह उधर से गुजरने वाले सारे व्यक्तियों का अध्ययन यह सोचकर करती रही कि, “ओह, इसके पास अवश्य ही धन होगा। मैं जानती हूँ यह मूल्य चुका सकता है और मुझे विश्वास है कि वह मेरे साथ अत्यधिक भोग कर सकेगा।” वह वेश्या गली पर के सभी पुरुषों के बारे में ऐसा ही सोचती रही।   |   bhagavat अध्याय 11.8: पिंगला की कथा   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 8: पिंगला की कथा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  11.8.24 
मार्ग आगच्छतो वीक्ष्य पुरुषान् पुरुषर्षभ ।
तान् शुल्कदान् वित्तवत: कान्तान् मेनेऽर्थकामुकी ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुष-श्रेष्ठ, यह वेश्या धन पाने के लिए अत्यधिक आतुर थी और जब वह रात में गली में खड़ी थी, तो वह उधर से गुजरने वाले सारे व्यक्तियों का अध्ययन यह सोचकर करती रही कि, “ओह, इसके पास अवश्य ही धन होगा। मैं जानती हूँ यह मूल्य चुका सकता है और मुझे विश्वास है कि वह मेरे साथ अत्यधिक भोग कर सकेगा।” वह वेश्या गली पर के सभी पुरुषों के बारे में ऐसा ही सोचती रही।
 
O best of men, this prostitute was very anxious to get money and as she stood in the street at night she kept studying all the men passing by, thinking, “Oh, he must have money. I know he can pay the price and I am sure he will be able to enjoy me to the fullest.” The prostitute kept thinking like this about all the men in the street.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)