ऋष्यशृंग नाम इस बात का प्रतीक है कि युवा ऋषि का जन्म उनके माथे से हिरण जैसे सींग के साथ हुआ था। यदि हिरण की तरह एक ऋषि मधुर संगीत की ध्वनियों से जुड़ जाता है जो इंद्रियों को तृप्त करने का वादा करती है, तो वह हिरण की तरह जल्दी से अभिभूत हो जाता है। एक विचारशील व्यक्ति को हिरण से विनम्रतापूर्वक निर्देश लेना चाहिए, जो संगीत की इंद्रिय संतुष्टि के आकर्षण के कारण बर्बाद हो जाता है।
