ग्राम्यगीतं न शृणुयाद् यतिर्वनचर: क्वचित् ।
शिक्षेत हरिणाद् बद्धान्मृगयोर्गीतमोहितात् ॥ १७ ॥
अनुवाद
वन में रहने वाले सन्यासियों को भौतिक भोग की भावना बढ़ाने वाले गानों या संगीत को कभी नहीं सुनना चाहिए। इसकी जगह उन्हें हिरणों की मिसाल पर ध्यान लगाना चाहिए, जो शिकारी के वाद्य के मधुर संगीत की वजह से अपने आप को पकड़वा लेते हैं और मौत का शिकार हो जाते हैं।
A forest dwelling ascetic should never listen to songs or music that stimulate material pleasures. Rather, a saintly person should carefully study the example of the deer, which is caught and killed after being mesmerized by the sweet music of the hunter's instrument.
तात्पर्य
यदि कोई भौतिक संगीत व गानों के इंद्रिय सुख में आसक्त हो जाए, तो वे भौतिक मोह के सभी लक्षणों का विकास करेंगे। व्यक्ति को भगवद्-गीता या सर्वोच्च भगवान द्वारा गाया गया गीत सुनना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥