श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 8: पिंगला की कथा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.8.14 
नाधिगच्छेत् स्त्रियं प्राज्ञ: कर्हिचिन्मृत्युमात्मन: ।
बलाधिकै: स हन्येत गजैरन्यैर्गजो यथा ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
विवेकवान् व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में अपनी इन्द्रियतृप्ति के लिए स्त्री के सुन्दर रूप का लाभ उठाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जिस तरह हथिनी से संभोग करने का प्रयास करने वाला हाथी उसके साथ संभोग कर रहे अन्य हाथियों के द्वारा मार डाला जाता है, उसी तरह, जो व्यक्ति किसी नारी के साथ संभोग करना चाहता है, वह किसी भी क्षण उसके अन्य प्रेमियों द्वारा मार डाला जा सकता है, जो उससे अधिक बलिष्ठ होते हैं।
 
A prudent person should not try to take advantage of a woman's beauty for his sense gratification under any circumstances. Just as an elephant who tries to mate with a female elephant is killed by the other elephants who are mating with her, similarly, a person who wants to mate with a woman can be killed at any moment by her other lovers, who are stronger than him.
तात्पर्य
एक स्त्री के सुंदर आकार की तरह ही पति भी मोहित होते है, और वही अन्य कई व्यक्ति भी मोहित होंगे, और खतरा है कि वे खुद से ताकतवर होंगे और ईर्ष्या में उसे मार भी सकते हैं। जोशीले अपराध बेहद आम हैं। यह भौतिक जीवन का एक और नुकसान है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)