जिस प्रकार मधुमक्खी छोटे-बड़े सभी तरह के फूलों से रस लेती है, उसी प्रकार एक बुद्धिमान व्यक्ति को सभी धार्मिक धर्मग्रंथों से सार तत्व लेना चाहिए।
Just as a honeybee collects nectar from all kinds of flowers, big and small, similarly an intelligent person should collect the essence from all religious scriptures.
तात्पर्य
मानवीय समाज मे मूलज्ञान वेद कहलाता है और वेद या ज्ञान का सार कृष्ण चेतना है। जैसा कि भगवद गीता (15।15) में कहा गया है: वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यः। मधुमक्खी से, एक बुद्धिमान व्यक्ति को सभी ज्ञान का सार या अमृत लेना सीखना चाहिए। एक मधुमक्खी पूरी झाड़ी या बगीचे को ले जाने की कोशिश करने में अपना समय बर्बाद नहीं करती है, बल्कि आवश्यक अमृत लेती है। इस प्रकार हम मधुमक्खी और गधे के बीच के अंतर का अध्ययन कर सकते हैं, जो भारी बोझ उठाता है। शिक्षा का अर्थ बौद्धिक गधा बनना नहीं है जो बेकार ज्ञान का भारी बोझ ढोता है; बल्कि, व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान को स्वीकार करना चाहिए जो आनंद और समझ के शाश्वत जीवन की ओर ले जाता है। वर्तमान समय में लोगों की आम तौर पर धर्म की एक सांप्रदायिक अवधारणा होती है, और फिर भी परम सत्य की कोई वैज्ञानिक समझ नहीं है। इस कविता में दिए गए मधुमक्खी के उदाहरण से ऐसे आत्मसंतुष्ट, हठधर्मी, सांप्रदायिक धर्मशास्त्री निश्चित रूप से कुछ सीख सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥