Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.7.73: इस प्रकार जो व्यक्ति अपने पारिवारिक जीवन से अत्यधिक लगाव रखता है, उसका हृदय अशांत रहता है। वह कबूतर की तरह सांसारिक यौन-आकर्षण में सुख खोजता रहता है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने में व्यस्त रहने वाला कंजूस व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों के साथ बहुत कष्ट भोगता है। | bhagavat अध्याय 11.7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार जो व्यक्ति अपने पारिवारिक जीवन से अत्यधिक लगाव रखता है, उसका हृदय अशांत रहता है। वह कबूतर की तरह सांसारिक यौन-आकर्षण में सुख खोजता रहता है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने में व्यस्त रहने वाला कंजूस व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों के साथ बहुत कष्ट भोगता है।
In this way, a person who is too attached to his family life remains troubled at heart. Like the pigeon, he keeps looking for happiness in worldly sexual attraction. Being badly busy in maintaining his family, a miserly person suffers a lot along with his family members.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥