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bhagavat 11.7.72: वह निर्दयी शिकारी, अपने मनोरथ को पूरा करके मुख्य कबूतर, उसकी पत्नी तथा उनके सभी बच्चों को बंदी बनाकर अपने घर को चल पड़ा।   |   bhagavat अध्याय 11.7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  11.7.72 
तं लब्ध्वा लुब्धक: क्रूर: कपोतं गृहमेधिनम् ।
कपोतकान् कपोतीं च सिद्धार्थ: प्रययौ गृहम् ॥ ७२ ॥
 
 
अनुवाद
वह निर्दयी शिकारी, अपने मनोरथ को पूरा करके मुख्य कबूतर, उसकी पत्नी तथा उनके सभी बच्चों को बंदी बनाकर अपने घर को चल पड़ा।
 
That ruthless hunter caught the pigeon, his wife and all their children and after fulfilling his desire, he set off for his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)