Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.7.71: जब पिता कबूतर ने अपने लाचार बच्चों को जाल में फंसे और मौत के नज़दीक देखा तो उन्हें इस हालत में संघर्ष करते देख उसका दिमाग अचानक खाली हो गया और वो भी शिकारी के जाल में फंस गया। | bhagavat अध्याय 11.7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तांस्तथैवावृतान् शिग्भिर्मृत्युग्रस्तान् विचेष्टत: ।
स्वयं च कृपण: शिक्षु पश्यन्नप्यबुधोऽपतत् ॥ ७१ ॥
अनुवाद
जब पिता कबूतर ने अपने लाचार बच्चों को जाल में फंसे और मौत के नज़दीक देखा तो उन्हें इस हालत में संघर्ष करते देख उसका दिमाग अचानक खाली हो गया और वो भी शिकारी के जाल में फंस गया।
When the father pigeon saw his poor children caught in the net and on the verge of death and struggling pitifully to free themselves, his mind went blank and he himself fell into the hunter's net.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥