श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  11.7.63 
द‍ृष्ट्वा तान् लुब्धक: कश्चिद् यद‍ृच्छातो वनेचर: ।
जगृहे जालमातत्य चरत: स्वालयान्तिके ॥ ६३ ॥
 
 
अनुवाद
उसी समय, एक शिकारी जो जंगल में घूम रहा था, उसने कबूतर के इन बच्चों को उनके घोंसले के पास इधर-उधर घूमते हुए देखा। उसने अपना जाल फैलाया और उन सभी को पकड़ लिया।
 
उसी समय, एक शिकारी जो जंगल में घूम रहा था, उसने कबूतर के इन बच्चों को उनके घोंसले के पास इधर-उधर घूमते हुए देखा। उसने अपना जाल फैलाया और उन सभी को पकड़ लिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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