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bhagavat 11.7.59: कबूतरों की यह जोड़ी अपने बच्चों से बहुत ही प्यार करने लगी और उनकी नादान चहचहाहट सुनकर बहुत खुशी होती थी, क्योंकि उन माता-पिता के लिए उसकी चहचहाहट बहुत प्यारी थी। इस प्रकार वह जोड़ा उन छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण करने लगा।   |   bhagavat अध्याय 11.7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  11.7.59 
तासां पतत्रै: सुस्पर्शै: कूजितैर्मुग्धचेष्टितै: ।
प्रत्युद्गमैरदीनानां पितरौ मुदमापतु: ॥ ६० ॥
 
 
अनुवाद
कबूतरों की यह जोड़ी अपने बच्चों से बहुत ही प्यार करने लगी और उनकी नादान चहचहाहट सुनकर बहुत खुशी होती थी, क्योंकि उन माता-पिता के लिए उसकी चहचहाहट बहुत प्यारी थी। इस प्रकार वह जोड़ा उन छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण करने लगा।
 
This pair of pigeons became very affectionate towards their children and were very happy to hear their strange chirping, because the parents found it very sweet. In this way the pair started raising those little children.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)