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bhagavat 11.7.53: एक कबूतर था, जो अपनी जीवनसंगिनी के साथ वन में निवास करता था। वह एक वृक्ष के अन्दर अपना बसेरा बनाकर, अपनी प्रेमिका कबूतरी के संग वहाँ कई वर्षों तक रहा।   |   bhagavat अध्याय 11.7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  11.7.53 
कपोत: कश्चनारण्ये कृतनीडो वनस्पतौ ।
कपोत्या भार्यया सार्धमुवास कतिचित् समा: ॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
एक कबूतर था, जो अपनी जीवनसंगिनी के साथ वन में निवास करता था। वह एक वृक्ष के अन्दर अपना बसेरा बनाकर, अपनी प्रेमिका कबूतरी के संग वहाँ कई वर्षों तक रहा।
 
There was a pigeon who lived in the forest with his wife. He made his nest inside a tree and lived there with the female pigeon for many years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)