श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  11.7.48 
विसर्गाद्या: श्मशानान्ता भावा देहस्य नात्मन: ।
कलानामिव चन्द्रस्य कालेनाव्यक्तवर्त्मना ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
जन्म से मृत्यु तक भौतिक जीवन के अलग-अलग चरण शरीर के गुणधर्म होते हैं और वो आत्मा को प्रभावित नहीं करते, ठीक वैसे ही जैसे चंद्रमा का घटना-बढ़ना खुद चंद्रमा को प्रभावित नहीं करता। ऐसे बदलाव समय की अदृश्य गति के कारण होते हैं।
 
The various stages of physical life from birth to death are properties of the body and do not affect the soul any more than the waxing and waning phases of the moon do not affect the moon. Such changes are brought about by the unmanifest motion of time.
तात्पर्य
शरीर छः परिवर्तनों से गुज़रता है:: जन्म, वृद्धि, स्थिरता, उप-उत्पादों का उत्पादन, ह्रास और मृत्यु। इसी प्रकार, चंद्रमा बढ़ता, घटता और अंत में गायब होता हुआ प्रतीत होता है। चूंकि चाँदनी सूर्य के प्रकाश का एक चंद्र प्रतिबिंब है, इसलिए यह समझा जाता है कि चंद्रमा स्वयं नहीं बढ़ता है या घटता है; बल्कि, हम चंद्रमा के प्रतिबिंब को विभिन्न चरणों में देखते हैं। उसी तरह, नित्य आत्मा का न तो जन्म होता है, न ही मृत्यु होती है, जैसा कि भगवद्-गीता (2.20) में पुष्टि की गई है: न जायते म्रियते वा कदाचित्। हम सूक्ष्म मन और स्थूल भौतिक शरीर के रूप में आत्मा के प्रतिबिंब को देखते हैं, जो विभिन्न भौतिक परिवर्तनों से गुजरते हैं।

श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, सूर्य एक अग्निमय ग्रह है और चंद्रमा एक जलीय ग्रह है। इसकी पुष्टि श्रील जीव गोस्वामी भी करते हैं और यह चंद्र ग्रह की वास्तविक प्रकृति के बारे में आधुनिक विज्ञान की अज्ञानता को और अधिक स्पष्ट करता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)