हालांकि, एक संत शुद्ध जल की तरह पवित्र होता है, जो सभी प्रकार के दोषों से मुक्त होता है और सारी चीज़ों को पवित्र कर सकता है। जिस तरह शुद्ध जल पारदर्शी होता है, उसी तरह एक संत भी अपने हृदय में भगवान के व्यक्तित्व को एकदम स्पष्ट रूप से प्रकट करता है। भगवान के लिए इस तरह का प्रेम ही सभी सुखों का भण्डार है। बहते हुए झरने का जल एक सुखद कंपन पैदा करता है और इसी तरह भगवान के पवित्र भक्त, जो कि भगवान की महिमा से ओतप्रोत होते हैं, से निकलने वाली ध्वनि स्पंदन बहुत ही आकर्षक और मनमोहक होती है। इस तरह, जल के स्वरूप का अध्ययन करके, भगवान के पवित्र भक्त के लक्षणों को समझा जा सकता है।
