श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  11.7.44 
स्वच्छ: प्रकृतित: स्‍निग्धो माधुर्यस्तीर्थभूर्नृणाम् ।
मुनि: पुनात्यपां मित्रमीक्षोपस्पर्शकीर्तनै: ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, सन्त-पुरुष जल के समान ही पवित्र होता है। जल की तरह ही वो कल्मषरहित, कोमल और मृदुल होते हैं। उनका बोलना भी बहते जल की कलकल ध्वनि जैसा सुखद होता है। ऐसे सन्त-पुरुष के दर्शन, स्पर्श या सुनने मात्र से ही मनुष्य पवित्र हो जाता है, जैसे जल से स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है। इस प्रकार, सन्त-पुरुष तीर्थस्थान के समान सबको पवित्र करते हैं, क्योंकि वे सदैव भगवान की महिमा का गुणगान करते रहते हैं।
 
O King, a saint is like water because he is free from impurities, is gentle in nature and his speech is like the gurgling sound of flowing water. By merely seeing, touching or hearing such a saint, a living being becomes pure in the same way as a man becomes clean by touching pure water. In this way, like a pilgrimage place, a saint purifies all those who come in contact with him because he always sings the glories of God.
तात्पर्य
अपाम् मित्रम् का शाब्दिक अर्थ है, "जैसे जल" इसे अघान मित्रम् के रूप में भी पढ़ा जा सकता है जिसका अर्थ है कि संत सभी जीवों को मित्रम् या अपने व्यक्तिगत मित्रों के रूप में स्वीकार करके पवित्र करता है और उन्हें उनके पापों (अघात) से बचाता है। प्रकृतिगत जीव स्वयं की गलत पहचान स्थूल भौतिक शरीर और सूक्ष्म मन से करता है और इसके कारण आध्यात्मिक ज्ञान से दूर हो जाता है। एक प्रकृतिगत जीव हमेशा भौतिक इन्द्रियों के सुखों की लालसा रखता है और यदि वह उन्हें प्राप्त नहीं कर पाता है तो क्रोधित हो जाता है। कभी-कभी वह अपनी भौतिक सुखों को खोने के भय से इतना ग्रसित हो जाता है कि वह पागलपन के करीब पहुँच जाता है।

हालांकि, एक संत शुद्ध जल की तरह पवित्र होता है, जो सभी प्रकार के दोषों से मुक्त होता है और सारी चीज़ों को पवित्र कर सकता है। जिस तरह शुद्ध जल पारदर्शी होता है, उसी तरह एक संत भी अपने हृदय में भगवान के व्यक्तित्व को एकदम स्पष्ट रूप से प्रकट करता है। भगवान के लिए इस तरह का प्रेम ही सभी सुखों का भण्डार है। बहते हुए झरने का जल एक सुखद कंपन पैदा करता है और इसी तरह भगवान के पवित्र भक्त, जो कि भगवान की महिमा से ओतप्रोत होते हैं, से निकलने वाली ध्वनि स्पंदन बहुत ही आकर्षक और मनमोहक होती है। इस तरह, जल के स्वरूप का अध्ययन करके, भगवान के पवित्र भक्त के लक्षणों को समझा जा सकता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)