हे राजन्, मैंने चौबीस गुरु बनाए हैं। वो कौन हैं? पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चाँद, सूरज, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, मधु-चोर, हिरण, मछली, पिंगला वेश्या, कुररी पक्षी, बालक, नवयुवती, बाण बनाने वाला, साँप, मकड़ी और ततैया। हे राजन्, इनके कार्यों का अध्ययन करके ही मैंने आत्म-ज्ञान सीखा है।
O King, I have taken refuge in twenty-four Gurus. These are- Earth, Wind, Sky, Water, Fire, Moon, Sun, Pigeon, Python, Ocean, Moth, Bee, Elephant, Honey-thief, Deer, Fish, Pingla prostitute, Kurri bird, Child, Young woman, Arrow maker, Snake, Spider and Wasp. O King, it is by studying their activities that I have learnt Self-knowledge.
तात्पर्य
तिरछा नाम सुपेसा-कृत इसलिए पड़ा है क्योंकि जो कीट वह मारता है उसे वह अगले जन्म में सुंदर रूप प्राप्त करवाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥