भगवान की रहस्यमय शक्ति, जिसे योग-माया कहा जाता है, वह अपने स्वयं के रूप, आवास, उपकरण, मनोरंजन, दल, आदि प्रकट करते हैं, और उपयुक्त समय पर वह हमारी सांसारिक दृष्टि से इन सभी को हटा देते हैं। भले ही हैरान रहने वाली शर्तों वाली आत्माएँ भगवान की आध्यात्मिक शक्ति पर संदेह कर सकते हैं, शुद्ध भक्त सीधे तौर पर उनके पारलौकिक स्वरूप को समझ सकते हैं और उसका आनंद उठा सकते हैं और उनके गायब होने, जिन्हें भगवद-गीता में जनम कर्म चा मे दिव्यम के रूप में वर्णित किया गया है। यदि कोई भगवान के पारलौकिक स्वरूप के इस पूर्ण ज्ञान को ईमानदारी से स्वीकार करता है, तो निश्चित रूप से वह वापस घर, भगवान की ओर जाएगा, और भगवान कृष्ण का एक शाश्वत साथी बन जाएगा।
