प्रायो धर्मार्थकामेषु विवित्सायां च मानवा: ।
हेतुनैव समीहन्त आयुषो यशस: श्रिय: ॥ २७ ॥
अनुवाद
आमतौर पर मनुष्य धर्म, अर्थ, काम और आत्मा के ज्ञान को अर्जित करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी सामान्य मंशा होती है अपनी उम्र बढ़ाना, यश हासिल करना और भौतिक सुख-सुविधाओं का आनंद लेना।
Generally, people work hard to acquire knowledge about Dharma, Artha, Kama and Atma. Their general aim is to increase their age, earn fame and enjoy material wealth.
तात्पर्य
एक बुद्धिमान व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि यदि शरीर से अलग एक शाश्वत आत्मा है, तो वास्तविक खुशी हमारी शाश्वत स्थिति में, भौतिक प्रकृति के बंधन से परे होनी चाहिए। हालाँकि, साधारण व्यक्ति, आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करने पर भी, आम तौर पर प्रसिद्ध होने की या आध्यात्मिक साधनाओं से अपने धन और जीवन की अवधि बढ़ाने की इच्छा रखते हैं। अधिकांश आम लोग सोचते हैं, उदाहरण के लिए, कि योग प्रणाली किसी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए है, कि कोई पैसों के लिए भगवान से प्रार्थना कर सकता है, और किसी का आध्यात्मिक ज्ञान समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए है। महाराज यदु यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि युवा ब्राह्मण अवधूत साधारण व्यक्तियों की तरह नहीं हैं और वह वास्तव में एक आध्यात्मिक मंच पर हैं, जैसा कि निम्नलिखित छंदों में समझाया जाएगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥