अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् ।
अवधूतस्य संवादं यदोरमिततेजस: ॥ २४ ॥
अनुवाद
इस संबंध में साधु-पुरुष राजा यदु और एक अवधूत के बीच हुई एक ऐतिहासिक वार्ता का उल्लेख करते हैं।
In this connection the sages cite the example of a historical conversation involving a very powerful king Yadu and an ascetic.
तात्पर्य
श्री कृष्ण इस कहानी को उदधव को दिखने के लिए बताएंगे की भक्ति-योग में बुद्धि का उपयोग कैसे किया जा सकता है वैदिक ज्ञान को ग्रहण करने के लिए और अंततः एक बुद्धिमान व्यक्ति भगवान के चरण कमलों में कैसे आ जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥