एकद्वित्रिचतुष्पादो बहुपादस्तथापद: ।
बह्व्य: सन्ति पुर: सृष्टास्तासां मे पौरुषी प्रिया ॥ २२ ॥
अनुवाद
इस संसार में कई प्रकार के प्राणियों के शरीर बनाए गए हैं - कुछ एक पैर वाले हैं, कुछ के दो, तीन, चार या ज़्यादा पैर होते हैं, और भी कई ऐसे होते हैं जिनके कोई पैर नहीं होते - लेकिन इन सब में से, मानव शरीर वास्तव में मुझे सबसे प्रिय है।
There are many kinds of created bodies in this world-some with one leg, some with two, three, four or more legs, and others without legs, but of all these the human form is my real favourite.
तात्पर्य
भौतिक सृष्टि का एकमात्र उद्देश्य, बद्ध जीवों को वापस अपने घर भगवान के पास ले जाना है। चूंकि बद्ध जीवों का यह उद्धार विशेष रूप से मानवीय जीवन रूप में संभव है, स्वाभाविक रूप से, यह रूप दयालु भगवान को विशेष रूप से प्रिय है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥