हालाँकि, देवता ईश्वर के नियमों का सख्ती से पालन करने का प्रयास करते हैं। और ऐसा करने में उनकी मदद करने के लिए, परम भगवान स्वर्गीय प्राणियों को अपने स्वयं के सर्वोच्च व्यक्तित्व की याद दिलाने के लिए अवतरित होते हैं, जिसमें उनकी शक्तियाँ अनंत रूप से अधिक होती हैं। भगवान विष्णु का एक शाश्वत शरीर है, जो आनंद, ज्ञान और असीमित विविध शक्तियों से भरा है, जबकि देवताओं के पास केवल डीलक्स भौतिक रूप हैं, जो जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और बीमारी के अधीन हैं।
क्योंकि देवता सृजित ब्रह्मांड पर शासन करने से जुड़े हुए हैं, ईश्वर के प्रति उनकी भक्ति भौतिक इच्छाओं से रंगी हुई है। इसलिए वे वैदिक ज्ञान के उन हिस्सों से आकर्षित होते हैं जो उनके खगोलीय जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक विभिन्न भौतिक भव्यता प्रदान करते हैं। हालाँकि, श्री उद्धव, भगवान के एक शुद्ध भक्त होने के नाते, वापस घर, वापस भगवान के पास, अनंत जीवन के लिए जाने के लिए दृढ़ हैं और इस प्रकार देवताओं के परिष्कृत वैदिक ज्ञान में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखते हैं। भौतिक दुनिया एक विशाल जेल है, जिसके निवासी जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और भ्रम के अधीन हैं, और एक शुद्ध भक्त की इच्छा नहीं है कि वह देवताओं की तरह प्रथम श्रेणी के कैदी के रूप में भी वहाँ रहे। श्री उद्धव भगवान के राज्य में लौटना चाहते हैं और इस कारण से सीधे भगवान के व्यक्तित्व से संपर्क करते हैं। भगवान स्व-दृश्य हैं, या जो खुद को उनके भक्त के सामने प्रकट करते हैं। इस प्रकार, केवल स्वयं भगवान या उनके शुद्ध भक्त, जो ईमानदारी से भगवान के संदेश को दोहराते हैं, किसी को भौतिक आकाश से परे आध्यात्मिक ग्रहों के मुक्त वातावरण में ले जा सकते हैं, जहाँ मुक्त आत्माएँ आनंद और सर्वज्ञता के शाश्वत जीवन का आनंद लेती हैं।
