हे प्रभु, मैं सबसे बड़ा मूर्ख हूँ, क्योंकि मेरी चेतना आपकी माया द्वारा निर्मित भौतिक शरीर तथा शारीरिक संबंधों में लीन है। इस प्रकार, मैं सोच रहा हूँ, "मैं यह शरीर हूँ और ये सारे संबंधी मेरे हैं।" इसलिए, हे प्रभु, अपने इस दीन सेवक को उपदेश दें। कृपया मुझे बताएं कि मैं आपके आदेशों का पालन कैसे कर सकता हूँ।
O Lord, I myself am the greatest fool, because my consciousness is absorbed in the material body and bodily relations created by Your Maya. Thus I am thinking, “I am this body and all these relations are mine.” Therefore, O Lord, instruct this humble servant of Yours. Please tell me how I may easily follow Your instructions.
तात्पर्य
भौतिक शरीर से झूठी पहचान को त्यागना बहुत ही कठिन है और इस प्रकार हम अपने तथाकथित शारीरिक संबंधों जैसे पत्नी, बच्चे, दोस्त इत्यादि से जुड़े रहते हैं। शारीरिक मोह हृदय में तीव्र पीड़ा उत्पन्न करता है और हम विलाप और आसक्ति से स्तब्ध रह जाते हैं। भगवान के एक शुद्ध भक्त श्री उद्धव, यहाँ एक सामान्य व्यक्ति की तरह बोलते हैं कि भगवान के व्यक्तित्व के लिए प्रार्थना कैसे की जाए। हम व्यावहारिक रूप से देखते हैं कि कई पापी व्यक्ति इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस में प्रवेश करते हैं और प्रारंभिक शुद्धिकरण के बाद अपनी पिछली अवैध गतिविधियों के लिए बहुत पश्चाताप करते हैं। उन्हें सदमा लगता है जब उन्हें पता चलता है कि उन्होंने माया द्वारा बनाए गए बेकार रूपों का पीछा करने के लिए ईश्वर का व्यक्तिगत साथ कैसे छोड़ दिया; इसलिए वे ईश्वर और भगवान कृष्ण से पूरी तरह से ट्रान्सेंडैंटल भक्ति सेवा में हमेशा के लिए व्यस्त रहने की प्रार्थना करते हैं। आध्यात्मिक उन्नति के लिए ऐसी पश्चातापयुक्त, उत्सुक मानसिकता सबसे शुभ है। भगवान निश्चित रूप से एक पश्चातापी भक्त की प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं जो माया के चंगुल से बचने के लिए बेताब रहता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥