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bhagavat 11.7.12: जो व्यक्ति सभी जीवों का कल्याण चाहता है, जो शांत है और ज्ञान और बोध में दृढ़ता से स्थिर है, वह सभी वस्तुओं को मुझमें देखता है। ऐसा व्यक्ति फिर से जन्म-मृत्यु के चक्र में कभी नहीं फंसता।   |   bhagavat अध्याय 11.7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 7: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  11.7.12 
सर्वभूतसुहृच्छान्तो ज्ञानविज्ञाननिश्चय: ।
पश्यन् मदात्मकं विश्वं न विपद्येत वै पुन: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति सभी जीवों का कल्याण चाहता है, जो शांत है और ज्ञान और बोध में दृढ़ता से स्थिर है, वह सभी वस्तुओं को मुझमें देखता है। ऐसा व्यक्ति फिर से जन्म-मृत्यु के चक्र में कभी नहीं फंसता।
 
A person who is well-wisher of all beings, who is calm and firmly established in knowledge and science, sees all things within me. Such a person never falls into the cycle of birth and death again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)