दोर्भ्यां पदाभ्यां जानुभ्यां
उरसा शिरसा दृशा
मनसा वचसा चेति
प्रणामोऽष्टांग ईरितः
"आठ अंगों के साथ नमन दो भुजाओं, दोनों पैरों, दोनों घुटनों, छाती, सिर, आँखों, मन और वाणी की शक्ति द्वारा किया जाता है।"
भौतिक प्रकृति की धाराएँ बहुत शक्तिशाली हैं, इसलिए व्यक्ति को भगवान के चरणकमलों को दृढ़ता से पकड़ना चाहिए। नहीं तो, इंद्रिय तृप्ति और मानसिक अटकलों की हिंसक लहरें निस्संदेह व्यक्ति को परम प्रभु के प्रेमपूर्ण सेवक के रूप में उसके शाश्वत, संवैधानिक पद से दूर कर देंगी, और फिर वह यहां कही गई कठोर बंधन में गिर जाएगा उरु-पाशात, "एक बहुत शक्तिशाली मायावी नेटवर्क।"
