श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 6: यदुवंश का प्रभास गमन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  11.6.29 
तदिदं यादवकुलं वीर्यशौर्यश्रियोद्धतम् ।
लोकं जिघृक्षद् रुद्धं मे वेलयेव महार्णव: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
वही यादव-कुल, जिसमें मैं प्रकट हुआ था, ऐश्वर्य में और खासकर अपने शारीरिक बल और साहस में इस हद तक बढ़ गया था कि वे पूरे संसार को निगल जाना चाहते थे। इसलिए मैंने उन्हें रोक दिया है, ठीक उसी तरह जैसे समुद्र तट विशाल समुद्र को रोकता है।
 
वही यादव-कुल, जिसमें मैं प्रकट हुआ था, ऐश्वर्य में और खासकर अपने शारीरिक बल और साहस में इस हद तक बढ़ गया था कि वे पूरे संसार को निगल जाना चाहते थे। इसलिए मैंने उन्हें रोक दिया है, ठीक उसी तरह जैसे समुद्र तट विशाल समुद्र को रोकता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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