श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 5: नारद द्वारा वसुदेव को दी गई शिक्षाओं का समापन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  11.5.50 
भूभारासुरराजन्यहन्तवे गुप्तये सताम् ।
अवतीर्णस्य निर्वृत्यै यशो लोके वितन्यते ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री हरि पृथ्वी के बोझ महा आसुरी राजाओं का नाश करने और संत-भक्तों का रक्षण करने के लिए अवतरित हुए। किन्तु असुर और भक्त दोनों को भगवान की कृपा से मुक्ति प्रदान की जाती है। इस प्रकार, उनकी दिव्य प्रसिद्धि ब्रह्मांड में फैल गई।
 
God has incarnated to kill the demon kings who are a burden on the earth and to protect the saint-devotees. But both the demon and the devotee are liberated by the grace of God. In this way His divine fame has spread throughout the universe.
तात्पर्य
संदेह पैदा हो सकता है कि ईश्वर इस भौतिक जगत में कैसे अवतरित होते हैं। और चूंकि वह लाखों ब्रह्मांडों के सर्वशक्तिमान रचयिता हैं, क्यों भक्त प्रभु की गतिविधियों को अद्भूत के रूप में महिमामंडित करते हैं जैसे की पुतना नामक एक चुड़ैल को उसके स्तन के माध्यम से उसका जीवन सोखकर मारना? यद्यपि ऐसी गतिविधियाँ निश्चित रूप से साधारण मनुष्यों की सीमा से परे हैं, ईश्वर द्वारा निष्पादित होने पर उन्हें अद्भुत क्यों माना जाना चाहिए? उत्तर इस श्लोक में निवृत्ती शब्द द्वारा दिया गया है। प्रभु ने राक्षसों को इसलिए नहीं मारा क्योंकि वह उनसे ईर्ष्या करता था, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक मुक्ति देने के लिए। इस प्रकार भक्तों और राक्षसों दोनों को उनके अचूक शगलों के द्वारा मुक्त करने में भगवान की अकारण दया स्पष्ट रूप से प्रभु को किसी भी अन्य जीवित इकाई, चाहे मनुष्य या देवता से अलग करती है। यह कहा गया है, मुक्ति-प्रदात सर्वेषां विष्णुर एव न संशयः: केवल विष्णु ही जन्म और मृत्यु से परे मुक्ति दे सकते हैं। श्रीला विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने बताया है कि आमतौर पर राक्षसों को ब्रह्म तेज में अवैयक्तिक मुक्ति प्रदान की जाती है, जबकि भक्तों को आध्यात्मिक ग्रहों में भगवान के प्रेम का श्रेष्ठ वरदान दिया जाता है। इस प्रकार, प्रभु जीवित संस्थाओं के सभी वर्गों के प्रति अपनी अकारण दया का प्रदर्शन करते हैं, और उनके प्रसिद्धि पूरे ब्रह्मांड में फैली हुई है। क्योंकि कृष्ण पारलौकिक हैं, उनकी प्रसिद्धि उनकी व्यक्तिगत अवतार से अलग नहीं है, इसलिए जैसे-जैसे प्रभु की प्रसिद्धि का विस्तार होता है, पूरे ब्रह्मांड को धीरे-धीरे मुक्त किया जाता है। ये भगवान की कुछ विशिष्ट विशेषताएं हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)