त्रेतायुग में भगवान की प्रशंसा विष्णु, यज्ञ, पृश्निगर्भ, सर्वदेव, उरुक्रम, वृषाकपि, जयंत और उरुगाय नामों से की जाती है।
In Tretayuga, God is praised by the names Vishnu, Yagya, Prishnigarbha, Sarvadev, Urukram, Vrishakapi, Jayant and Urugaya.
तात्पर्य
प्रश्निगर्भ का अर्थ है पृष्णदेवी और प्रजापति सुतापा के पुत्र के रूप में कृष्ण का अवतार। वृषाकपि इस ओर इशारा करता है कि यदि जीव मात्र भगवान का स्मरण करते हैं, तो वह उन पर सभी आशीर्वादों की वर्षा करने को इच्छुक रहते हैं, जिससे उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं और उनकी व्यथाएं दूर होती हैं। चूंकि भगवान हमेशा विजयी रहते हैं, उन्हें जयंत कहा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥