श्रीकरभाजन उवाच
कृतं त्रेता द्वापरं च कलिरित्येषु केशव: ।
नानावर्णाभिधाकारो नानैव विधिनेज्यते ॥ २० ॥
अनुवाद
श्री करभाज़न ने उत्तर दिया- कृत, त्रेता, द्वापर और कलि इन चारों युगों में से प्रत्येक में भगवान केशव अलग-अलग वर्ण, नाम और रूपों में प्रकट होते हैं और विभिन्न विधियों से उनकी पूजा की जाती है।
Śrī Karbhajana replied: In each of the four yugas, viz. Krita, Treta, Dvapara and Kali, Lord Keshava appears in various colours, names and forms and is worshipped in various ways.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥