हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि इस ब्रह्मांड के अधिआत्मा और निर्माता के रूप में भगवान नारायण का कालक्षेप आध्यात्मिक जगत में नारायण के शाश्वत कालक्षेपों की तुलना में निम्न स्तर का है। क्या भगवान नारायण भौतिक सृजन के अपने कार्यों में अपने अलौकिक आनंद और ज्ञान को कम करने जा रहे हैं, उन्हें एक बद्ध आत्मा वाला माना जाएगा, जो भ्रामक शक्ति के सम्पर्क से प्रभावित होती है। लेकिन चूंकि भगवान नारायण माया के प्रभाव से शाश्वत रूप से दूर हैं, इस ब्रह्मांड के अधिआत्मा के रूप में उनके कार्य आध्यात्मिक जगत में उनके कार्यों के समान ही अलौकिक स्तर पर हैं। भगवान के व्यक्तित्व के सभी कार्य उनके असीमित आध्यात्मिक कालक्षेपों का हिस्सा और पार्सल हैं।
