श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 4: राजा निमि से द्रुमिल द्वारा ईश्वर के अवतारों का वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.4.21 
नि:क्षत्रियामकृत गां च त्रि:सप्तकृत्वो
रामस्तु हैहयकुलाप्ययभार्गवाग्नि: ।
सोऽब्धिं बबन्ध दशवक्त्रमहन् सलङ्कं
सीतापतिर्जयति लोकमलघ्नकीर्ति: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
हैहय वंश को भस्म करने वाली अग्नि के रूप में भगवान परशुराम का जन्म भृगु कुल में हुआ। इस प्रकार भगवान परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से रहित कर दिया। वे सिताराम के रूप में प्रकट हुए और दस सिरों वाले रावण सहित लंका की समस्त सेना का नाश किया। वे श्री राम, जिनकी कीर्ति संसार के पापों को नष्ट करती है, सदैव विजयी रहें!
 
Parashurama was born in the Bhrigu dynasty as Agni, who burnt the Haihaya clan to ashes. In this way Lord Parashurama made the earth devoid of Kshatriyas twenty-one times. The same Lord appeared in the form of Ramachandra, husband of Sita Devi, and killed the ten-headed Ravana along with all the soldiers of Lanka. May that Shri Ram, whose fame destroys the sins of the world, always be victorious!
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, भगवान रामचंद्र नौ योगेंद्रों के लिए कमोबेश समकालिक अवतार थे। इसलिए उन्होंने भगवान रामचंद्र को विशेष सम्मान दिया है, जैसा कि जयति शब्द से संकेत मिलता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)