हंसस्वरूप्यवददच्युत आत्मयोगं
दत्त: कुमार ऋषभो भगवान् पिता न: ।
विष्णु: शिवाय जगतां कलयावतीर्ण-
स्तेनाहृता मधुभिदा श्रुतयोहयास्ये ॥ १७ ॥
अनुवाद
अच्युत भगवान विष्णु ने अपने कई विविध अवतारों में इस दुनिया में कदम रखा है, जैसे भगवान हंस, दत्तात्रेय, चार कुमार और हमारे अपने पिता, महान ऋषभदेव। इन अवतारों द्वार भगवान पूरे ब्रह्मांड को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आत्म-साक्षात्कार के विज्ञान को सिखाते हैं। हयग्रीव के रूप में प्रकट होकर उन्होंने मधु नामक राक्षस का वध किया और इस तरह वे पाताल-लोक से वेदों को वापस ले आये।
The infallible Lord Vishnu has appeared in this world in the form of His various partial incarnations, such as Hansa, Dattatreya, the four Kumaras and our own father, the great Rishabhadeva. Through such incarnations the Lord teaches the science of Self-realization for the benefit of the entire universe. He appeared as Hayagriva and killed the demon Madhu and thus brought back the Vedas from the netherworld.
तात्पर्य
स्कन्द पुराण में कहा गया है कि संपूर्ण ब्रह्मांड के ईश्वर, स्वयं हरि, एक बार कुमार नामक एक युवा ब्रह्मचारी के रूप में प्रकट हुए थे और उन्होंने सनत-कुमार को दिव्य ज्ञान दिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥