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bhagavat 11.4.16: देवताओं के सेवक इन्द्र के दरबार में पहुँचे और तीनों स्वर्गों के निवासियों के सामने नारायण की असीम शक्ति के बारे में इन्द्र को बताया। जब इन्द्र ने नर-नारायण ऋषि के बारे में सुना और अपने अपराध के बारे में जाना, तो वह भयभीत और विस्मित हुआ।   |   bhagavat अध्याय 11.4: राजा निमि से द्रुमिल द्वारा ईश्वर के अवतारों का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 4: राजा निमि से द्रुमिल द्वारा ईश्वर के अवतारों का वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  11.4.16 
इन्द्रायानम्य सदसि श‍ृण्वतां त्रिदिवौकसाम् ।
ऊचुर्नारायणबलं शक्रस्तत्रास विस्मित: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के सेवक इन्द्र के दरबार में पहुँचे और तीनों स्वर्गों के निवासियों के सामने नारायण की असीम शक्ति के बारे में इन्द्र को बताया। जब इन्द्र ने नर-नारायण ऋषि के बारे में सुना और अपने अपराध के बारे में जाना, तो वह भयभीत और विस्मित हुआ।
 
The servants of the gods reached Indra's court and in front of the inhabitants of the three heavens, they told Indra about Narayana's supreme power. When Indra heard about Nara-Narayana Rishi and became aware of his crime, he was frightened and surprised.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)