श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 4: राजा निमि से द्रुमिल द्वारा ईश्वर के अवतारों का वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.4.14 
तानाह देवदेवेश: प्रणतान् प्रहसन्निव ।
आसामेकतमां वृङ्‍ध्वं सवर्णां स्वर्गभूषणाम् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
तब देवों के परमेश्वर ने हल्की मुस्कान के साथ अपने सामने झुके हुए स्वर्ग के प्रतिनिधियों से कहा, "तुम इन महिलाओं में से जिसे भी उपयुक्त समझो, उसे चुन लो। वह स्वर्गलोक की शोभा बढ़ाएगी।"
 
Then the God of gods smiled slightly and said to the representatives of heaven bowing before him, “Choose any of these women whom you find suitable. She will become the ornament of heaven.”
तात्पर्य
नर-नारायण ऋषि देवताओं की पराजय देखकर लगभग हँस पड़े थे। हालाँकि, अत्यधिक गंभीर होने के कारण, वे वास्तव में नहीं हँसे। यद्यपि देवता यह सोच रहे होंगे, "इन स्त्रियों की तुलना में हम साधारण निम्न श्रेणी के मूर्ख हैं," प्रभु ने उन्हें इन स्त्रियों में से किसी एक को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसे वे अपने चरित्र के बराबर मानते हों। इस प्रकार चुनी गई सुंदरी स्वर्ग का श्रृंगार बनेगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)