Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.4.13: जब देवताओं के सेवकों ने नर-नारायण ऋषि द्वारा उत्पन्न स्त्रियों के मोहक सौन्दर्य पर दृष्टि डाली और उनके शरीरों की सुगन्ध को सूँघा तो उनका मन विचलित हो गया। निश्चित रूप से, ऐसी स्त्रियों के सौन्दर्य और भव्यता को देखकर, देवताओं के प्रतिनिधियों का अपना ऐश्वर्य तुच्छ लगने लगा। | bhagavat अध्याय 11.4: राजा निमि से द्रुमिल द्वारा ईश्वर के अवतारों का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते देवानुचरा दृष्ट्वा स्त्रिय: श्रीरिव रूपिणी: ।
गन्धेन मुमुहुस्तासां रूपौदार्यहतश्रिय: ॥ १३ ॥
अनुवाद
जब देवताओं के सेवकों ने नर-नारायण ऋषि द्वारा उत्पन्न स्त्रियों के मोहक सौन्दर्य पर दृष्टि डाली और उनके शरीरों की सुगन्ध को सूँघा तो उनका मन विचलित हो गया। निश्चित रूप से, ऐसी स्त्रियों के सौन्दर्य और भव्यता को देखकर, देवताओं के प्रतिनिधियों का अपना ऐश्वर्य तुच्छ लगने लगा।
When the followers of the gods looked at the enchanting beauty of the women created by Nara-Narayana Rishi and smelled the fragrance of their bodies, their minds were enchanted. Undoubtedly, seeing the beauty and grandeur of such women, the followers of the gods started considering their wealth as trivial.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥