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bhagavat 11.31.8: ब्रह्मा इत्यादि देवता और अन्य उच्चतर प्राणी भगवान कृष्ण को उनके धाम में प्रवेश करते हुए नहीं देख सके क्योंकि भगवान ने अपनी गतिविधियों को प्रकट नहीं होने दिया था। लेकिन कुछ ने उन्हें देख लिया और वे अत्यधिक चकित थे।   |   bhagavat अध्याय 11.31: भगवान् श्रीकृष्ण का अंतर्धान होना   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 31: भगवान् श्रीकृष्ण का अंतर्धान होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  11.31.8 
देवादयो ब्रह्ममुख्या न विशन्तं स्वधामनि ।
अविज्ञातगतिं कृष्णं दद‍ृशुश्चातिविस्मिता: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा इत्यादि देवता और अन्य उच्चतर प्राणी भगवान कृष्ण को उनके धाम में प्रवेश करते हुए नहीं देख सके क्योंकि भगवान ने अपनी गतिविधियों को प्रकट नहीं होने दिया था। लेकिन कुछ ने उन्हें देख लिया और वे अत्यधिक चकित थे।
 
The demigods and higher beings such as Brahmā could not see Lord Kṛṣṇa entering His abode because the Lord did not allow His activities to be revealed. But some did see Him and were greatly astonished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)