श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 31: भगवान् श्रीकृष्ण का अंतर्धान होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  11.31.4 
ववृषु: पुष्पवर्षाणि विमानावलिभिर्नभ: ।
कुर्वन्त: सङ्कुलं राजन् भक्त्या परमया युता: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, आकाश में अपने अनेकों वायुयान भरकर उन्होंने अत्यंत भक्तिभाव से पुष्पवर्षा की।
 
हे राजन, आकाश में अपने अनेकों वायुयान भरकर उन्होंने अत्यंत भक्तिभाव से पुष्पवर्षा की।
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