श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 31: भगवान् श्रीकृष्ण का अंतर्धान होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  11.31.19 
प्राणांश्च विजहुस्तत्र भगवद्विरहातुरा: ।
उपगुह्य पतींस्तात चितामारुरुहु: स्‍त्रिय: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
प्रभु के वियोग से आकुल होकर उनके पिता-माता ने उसी स्थान पर अपने प्राण त्याग दिये। परीक्षित! तत्पश्चात यादवों की पत्नियाँ अपने-अपने मृत पतियों को गले लगाकर चिताओं पर चढ़ बैठीं।
 
Distressed by the separation from the Lord, his parents gave up their lives at that very spot. O Parikshit, the wives of the Yadavas then embraced their dead husbands and ascended the funeral pyres.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)