Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.30.50: जैसा आदेश मिला था, दारुक ने प्रभु की परिक्रमा की और बार-बार नमन किया। उसने भगवान के चरणकमलों को अपने सिर पर रखा और फिर दुखी मन से नगर को लौट गया। | bhagavat अध्याय 11.30: यदुवंश का संहार । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसा आदेश मिला था, दारुक ने प्रभु की परिक्रमा की और बार-बार नमन किया। उसने भगवान के चरणकमलों को अपने सिर पर रखा और फिर दुखी मन से नगर को लौट गया।
Having received this order, Daruk circumambulated the Lord and bowed down to Him repeatedly. He placed the Lord's lotus feet on his head and then returned to the city with a sad heart.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध ग्यारह के अंतर्गत तीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥