श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  11.30.49 
त्वं तु मद्धर्ममास्थाय ज्ञाननिष्ठ उपेक्षक: ।
मन्मायारचितामेतां विज्ञायोपशमं व्रज ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
हे दारुक, तुम आध्यत्मिक ज्ञान में स्थिर होकर और भौतिक विचारों से दूर रहकर मेरी भक्ति में दृढ़ रहना। तुम इन लीलाओं को मेरी मायाशक्ति का प्रदर्शन समझकर शांत रहना।
 
O Daruk, remain firmly established in devotion to Me, being established in spiritual knowledge and being detached from material thoughts. Recognizing these pastimes as the display of My illusory power, remain calm.
तात्पर्य
श्रील जीवा गोस्वामी के अनुसार, यहाँ 'तु' शब्द इस बात पर बल देता है कि दास्ताजी भगवान कृष्ण के एक शाश्वत रूप से मुक्त सहयोगी हैं, जो वैकुंठ से अवतरित हुए हैं। इसलिए, भले ही अन्य व्यक्ति प्रभु के आमोद-प्रमोद से विचलित हों, दास्ताजी को शांत रहना चाहिए और आध्यात्मिक ज्ञान में स्थिर रहना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)