श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  11.30.46 
गच्छ द्वारवतीं सूत ज्ञातीनां निधनं मिथ: ।
सङ्कर्षणस्य निर्याणं बन्धुभ्यो ब्रूहि मद्दशाम् ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
हे सारथी, मैं तुमसे द्वारका जाकर अपने परिजनों व स्वजनों को यह बताने के लिए भेजता हूँ कि किस प्रकार उन सभी के प्रियजनों ने एक दूसरे का विनाश कर दिया है। साथ ही उन्हें भगवान संकर्षण के गायब होने और मेरी वर्तमान दशा के बारे में भी बताना।
 
O charioteer, go to Dwaraka and tell our family members how their loved ones have destroyed each other. Also tell them about the disappearance of Sankarshana and my present condition.
तात्पर्य
प्रभु कृष्ण ने अपने सारथी को घोड़ों व हथियारों के साथ वैकुण्ठ वापस भिजवा दिया था क्योंकि सारथी, दारुक को पृथ्वी पर अभी एक अंतिम सेवा करनी थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)