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bhagavat 11.30.40: भगवान कृष्ण द्वारा, जो अपनी इच्छा से अपना दिव्य शरीर धारण करते हैं, ऐसा निर्देश पाकर, उस शिकारी ने प्रभु की तीन बार परिक्रमा की और उनके आगे सर झुकाया। फिर वह शिकारी उस हवाई जहाज से चला गया जो उसे आध्यात्मिक आकाश तक पहुँचाने के लिए विशेष रूप से प्रकट हुआ था।   |   bhagavat अध्याय 11.30: यदुवंश का संहार   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  11.30.40 
इत्यादिष्टो भगवता कृष्णेनेच्छाशरीरिणा ।
त्रि: परिक्रम्य तं नत्वा विमानेन दिवं ययौ ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण द्वारा, जो अपनी इच्छा से अपना दिव्य शरीर धारण करते हैं, ऐसा निर्देश पाकर, उस शिकारी ने प्रभु की तीन बार परिक्रमा की और उनके आगे सर झुकाया। फिर वह शिकारी उस हवाई जहाज से चला गया जो उसे आध्यात्मिक आकाश तक पहुँचाने के लिए विशेष रूप से प्रकट हुआ था।
 
Upon receiving the command of Lord Krishna, who assumed His divine body at His own will, the hunter circumambulated the Lord three times and bowed his head to Him. Thereafter, the hunter departed in the aircraft that appeared at that very moment to take him to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)