श्री ऋषिरुवाच
दिवि भुव्यन्तरिक्षे च महोत्पातान् समुत्थितान् ।
दृष्ट्वासीनान् सुधर्मायां कृष्ण: प्राह यदूनिदम् ॥ ४ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा : आकाश, पृथ्वी और बाहरी अंतरिक्ष में कई अशुभ लक्षणों को देखकर भगवान कृष्ण ने सुधर्मा नामक सभा भवन में एकत्र यदुओं से इस प्रकार कहा।
Sukadeva Goswami said: Having seen many signs of disturbance in the sky, on the earth and in outer space, Lord Krishna spoke thus to the Yadavas assembled in the assembly hall called Sudharma.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, आकाश में अशुभ संकेत सूर्य के चारों ओर एक प्रभामंडल का प्रकट होना था, पृथ्वी पर छोटे भूकंप आ रहे थे और इसी के साथ बाहरी अंतरिक्ष में क्षितिज पर एक अप्राकृतिक लाली थी। ये और ऐसे ही अन्य अशुभ संकेतों का निवारण करना असंभव था, क्योंकि इनकी व्यवस्था स्वयं भगवान कृष्ण ने करवाई थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥