Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 11.30.34: तत्पश्चात् उसने चतुर्भुज देवता को देखा, तब उसे अपने किए हुए अपराध का भय लगने लगा और वह दैत्यों के शत्रु के चरणों में अपना सिर रखकर जमीन पर गिर पड़ा।   |   bhagavat अध्याय 11.30: यदुवंश का संहार   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  11.30.34 
चतुर्भुजं तं पुरुषं द‍ृष्ट्वा स कृतकिल्बिष: ।
भीत: पपात शिरसा पादयोरसुरद्विष: ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने चतुर्भुज देवता को देखा, तब उसे अपने किए हुए अपराध का भय लगने लगा और वह दैत्यों के शत्रु के चरणों में अपना सिर रखकर जमीन पर गिर पड़ा।
 
Thereafter, seeing the four-armed Person, the hunter became terrified of his crime and fell down on the ground, placing his head at the feet of the enemy of the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)