तब जरा नाम का शिकारी वहाँ आया और उसने भगवान के चरणों को हिरण का मुँह समझ लिया। यह सोचकर कि उसे उसका शिकार मिल गया है, जरा ने भगवान के पैर पर उस तीर से वार कर दिया जो उसने साँबा के गदे के बचे हुए लोहे के टुकड़े से बनाया था।
Just then a hunter named Jara, who had come to the place, mistook the Lord's foot for the face of a deer. Thinking that he had found his prey, Jara pierced the foot with an arrow he had made from a piece of iron left over from Samba's mace.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के अनुसार, यह कथन कि तीर ने "भगवान के पैर को छेद दिया" से शिकारी के दृष्टिकोण का पता चलता है, जिसने सोचा था कि उसने एक हिरण को मारा है। वास्तव में तीर केवल भगवान के कमल चरण को छू गया और उसे छेदा नहीं, क्योंकि भगवान के अंग अनंत, ज्ञान और आनंद से बने हैं। अन्यथा, अगले श्लोक के वर्णन (कि शिकारी भयभीत हो गया और भगवान के चरणों पर अपना सिर रखकर गिर गया) में, शुकदेव गोस्वामी ने कहा होता कि उसने भगवान के पैर से अपना तीर निकाला।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥