प्रत्याक्रष्टुं नयनमबला यत्र लग्नं न शेकु:
कर्णाविष्टं न सरति ततो यत् सतामात्मलग्नम् ।
यच्छ्रीर्वाचां जनयति रतिं किं नु मानं कवीनां
दृष्ट्वा जिष्णोर्युधि रथगतं यच्च तत्साम्यमीयु: ॥ ३ ॥
अनुवाद
एक बार उनकी अलौकिक आकृति पर नजर टिक जाने के बाद महिलाएँ अपनी नजरें हटा नहीं पाती थीं और यदि यह आकृति ऋषियों के कानों में प्रवेश कर उनके हृदय में बस जाती थी, तो फिर वह कभी बाहर नहीं निकलती थी। प्रसिद्धि पाने की बात तो दूर, भगवान के सौंदर्य का वर्णन करने वाले महान कवि भी अपने शब्दों को दिव्य और मनमोहक बना पाते थे। अर्जुन के रथ पर उनके इस रूप को देखकर कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि के सभी योद्धाओं ने मोक्ष प्राप्त कर लिया, जिससे उन्हें भगवान जैसा आत्मिक शरीर मिल गया।
Once women had fixed their eyes on His divine form, they were unable to remove it, and if that form once entered the ears of sages and penetrated their hearts, it could not be removed. What to say about fame, the words of the great poets who described the beauty of the Lord's form got stuck in the divine captivating attraction. And seeing that form on Arjuna's chariot, all the warriors on the battlefield of Kurukshetra attained salvation by acquiring spiritual bodies like the Lord.
तात्पर्य
आध्यात्मिक रूप से पूर्ण और मुक्त व्यक्तित्व जैसे वृंदावन की गोपियां और मूल भाग्य की देवी रूक्मिणी लगातार भगवान के आध्यात्मिक शरीर का ध्यान करती थीं। महान मुक्त संत (सातम), भगवान कृष्ण के शरीर के बारे में सुनकर, उसे अपने हृदय से निकाल नहीं पाए। भगवान के शरीर की सुंदरता ने महान मुक्त कवियों के प्रेम और काव्यात्मक उत्पादन का विस्तार किया, और केवल भगवान कृष्ण के शरीर को देखकर, कुरुक्षेत्र के योद्धाओं ने भगवान के समान एक शाश्वत शरीर के साथ आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त की। इसलिए यह कल्पना करना असंभव है कि भगवान कृष्ण का आनंद का शाश्वत रूप किसी भी तरह से भौतिक हो। जो लोग कल्पना करते हैं कि भगवान कृष्ण ने अपना शाश्वत रूप त्याग दिया, वे निश्चित रूप से भगवान की मायावी ऊर्जा से भ्रमित हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥