श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  11.30.26 
राम: समुद्रवेलायां योगमास्थाय पौरुषम् ।
तत्याज लोकं मानुष्यं संयोज्यात्मानमात्मनि ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
तब बलरामजी समुद्र के तट पर बैठ गये और उन्होंने भगवान् में अपना चित्त लगाया। अपने आपको अपने आप में विलीन कर दिया और इस नश्वर संसार को त्याग दिया।
 
Then Balarama sat down on the seashore and fixed himself in the meditation of God. Absorbing himself in himself, he left this mortal world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)