Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 11.30.19: इस प्रकार से विमूढ़ होकर पुत्र अपने पिता के साथ, भाई अपने भाई के साथ, भतीजे अपने मामा के साथ, भांजे अपने चाचा के साथ और नाती अपने दादाजी के साथ लड़ने लगे। मित्र अपने मित्र के साथ तथा शुभेच्छु अपने शुभेच्छु के साथ लड़ने लगे। इस तरह से घनिष्ठ मित्रों और संबंधियों ने एक-दूसरे की हत्या कर दी।   |   bhagavat अध्याय 11.30: यदुवंश का संहार   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  11.30.19 
पुत्रा अयुध्यन् पितृभिर्भ्रातृभिश्च
स्वस्रीयदौहित्रपितृव्यमातुलै: ।
मित्राणि मित्रै: सुहृद: सुहृद्भ‍ि-
र्ज्ञातींस्त्वहन् ज्ञातय एव मूढा: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार से विमूढ़ होकर पुत्र अपने पिता के साथ, भाई अपने भाई के साथ, भतीजे अपने मामा के साथ, भांजे अपने चाचा के साथ और नाती अपने दादाजी के साथ लड़ने लगे। मित्र अपने मित्र के साथ तथा शुभेच्छु अपने शुभेच्छु के साथ लड़ने लगे। इस तरह से घनिष्ठ मित्रों और संबंधियों ने एक-दूसरे की हत्या कर दी।
 
Thus, sons, overcome by attachment, began to fight their fathers, brothers against brothers, nephews against their maternal uncles, nephews against their paternal uncles and grandsons against their grandfathers. Friends clashed with friends and well-wishers against well-wishers. Thus, close friends and relatives killed each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)