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bhagavat 11.30.18: विविध यदुवंशियों, जैसे दाशार्ह, वृष्णि, अंधक, भोज, सात्वत, मधु, अर्बुद, माथुर, शूरसेन, विसर्जन, कुकुर और कुन्ति ने अपनी स्वाभाविक मित्रता को पूरी तरह से त्याग कर एक-दूसरे को मार डाला।   |   bhagavat अध्याय 11.30: यदुवंश का संहार   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.30.18 
दाशार्हवृष्ण्यन्धकभोजसात्वता
मध्वर्बुदा माथुरशूरसेना: ।
विसर्जना: कुकुरा: कुन्तयश्च
मिथस्तु जघ्नु: सुविसृज्य सौहृदम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
विविध यदुवंशियों, जैसे दाशार्ह, वृष्णि, अंधक, भोज, सात्वत, मधु, अर्बुद, माथुर, शूरसेन, विसर्जन, कुकुर और कुन्ति ने अपनी स्वाभाविक मित्रता को पूरी तरह से त्याग कर एक-दूसरे को मार डाला।
 
Various Yaduvanshis - the Dasharhas, the Vrishnis and Andhakas, the Bhojas, the Satvatas, the Madhus and Arbudas, the Mathuras, the Shurasenas, the Visarjans, the Kukuras and the Kuntis - abandoned their natural friendship and killed one another.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)