श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 30: यदुवंश का संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  11.30.1 
श्रीराजोवाच
ततो महाभागवत उद्धवे निर्गते वनम् ।
द्वारवत्यां किमकरोद् भगवान् भूतभावन: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
राजा परीक्षित ने कहा: जब महा भक्त उद्धव जंगल के लिए निकल गए तब समस्त प्राणियों के रक्षक भगवान श्री कृष्ण ने द्वारका नगरी में क्या किया?
 
King Parikshit said: When the great devotee Uddhava went to the forest, what did the Lord, the protector of all living beings, do in the city of Dwaraka?
तात्पर्य
परिक्षित महाराज अब शुकदेव गोस्वामी से इस काण्ड के प्रथम अध्याय के विषय में प्रश्न करते हैं, जो कि यादव वंश का नाश और भगवान कृष्ण का आध्यात्मिक आकाश में वापस लौटना है। क्योंकि भगवान कृष्ण यादव वंश के एक साधारण सदस्य की भूमिका निभा रहे थे, वे ब्राह्मणों के श्राप के परिणामस्वरूप अपने सांसारिक लीलाओं को छोड़ने के लिए प्रकट हुए। भगवान कृष्ण को वास्तव में कोई शापित नहीं कर सकता है। वधा मुनी और अन्य ऋषि जिन्होंने यादव वंश को शाप दिया था, भगवान कृष्ण के शाश्वत भक्त हैं और वे उनको शाप नहीं दे सकते थे। इसलिए, अपनी लीलाओं को छोड़ने और यादव वंश के साथ पृथ्वी छोड़ने पर, भगवान कृष्ण ने अपनी आंतरिक शक्ति और व्यक्तिगत इच्छा का प्रदर्शन किया, क्योंकि कोई भी भगवान की सर्वोच्च शक्ति को चुनौती नहीं दे सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)