Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.29.45: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस तरह भौतिक जीवन के समस्त कष्टों को नष्ट करने वाली बुद्धि के स्वामी भगवान कृष्ण द्वारा निर्देशित होने पर श्री उद्धव ने भगवान की परिक्रमा की और फिर भगवान के चरणों पर अपना सिर रखकर भूमि पर लेट गए। यद्यपि उद्धव सारे भौतिक द्वंद्वों के प्रभाव से मुक्त थे, फिर भी उनका हृदय विदीर्ण हो रहा था और विदा के इस समय उन्होंने अपने आँसुओं से भगवान् के चरणकमलों को भिगो दिया। | bhagavat अध्याय 11.29: भक्ति-योग । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस तरह भौतिक जीवन के समस्त कष्टों को नष्ट करने वाली बुद्धि के स्वामी भगवान कृष्ण द्वारा निर्देशित होने पर श्री उद्धव ने भगवान की परिक्रमा की और फिर भगवान के चरणों पर अपना सिर रखकर भूमि पर लेट गए। यद्यपि उद्धव सारे भौतिक द्वंद्वों के प्रभाव से मुक्त थे, फिर भी उनका हृदय विदीर्ण हो रहा था और विदा के इस समय उन्होंने अपने आँसुओं से भगवान् के चरणकमलों को भिगो दिया।
Sukadeva Goswami said: Thus addressed by Lord Krishna, the possessor of the wisdom which destroys all the sufferings of material life, Sri Uddhava circumambulated the Lord and then lay down on the ground, placing his head at the Lord's feet. Although Uddhava was free from the effects of all material conflicts, his heart was pierced, and at the time of departure he wet the Lord's lotus feet with his tears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥